सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि उन्होंने यह ऐलान नहीं किया है कि अब से नए चैनलों को प्रसारण की अनुमति नहीं मिलेगी। बल्कि उनका मंत्रालय सिर्फ यह कोशिश कर रहा है कि चैनलों को प्रसारण की अनुमति देने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रखी जाए। मंत्रालय ने अपने सचिव द्वारा अक्तूबर 2009 में ट्राई को लिखे पत्र (कि वह नए मानदंड तय करने के लिए मंत्रलय को सुझाव दे) की अवधि के बाद के आवेदनों पर गौर करने से मना कर दिया है। जिनका इस अवधि से पहले आवेदन आया है, उन पर जरूरी प्रक्रिया जारी है।
सोनी ने बताया कि ट्राई संभवत: मार्च तक अपने सुझाव मंत्रालय को दे देगा। सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सभी केन्द्रीय मंत्रालयों से कहा है कि वे खुद ही अपने विज्ञापन जारी करने के बजाए उसे डीएवीपी के जरिए ही मीडिया में जारी करें। अंबिका सोनी ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि मंत्रालयों से कहा है कि अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो यदाकदा गलतियां होती रहेंगी और इसके लिए उनके मंत्रालय का विभाग डीएवीपी (श्रव्य एवं दृश्य प्रचार विभाग) जिम्मेदार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सचिव ने भी इस आशय के निर्देश सभी मंत्रालयों के दिए हैं और यह भी कहा है कि संबंधित मंत्रलय विज्ञापनों के साथ यह निर्देश न भेजें कि किन किन अखबारों या चैनलों पर वे विज्ञापन प्रकाशित/प्रसारित हों।
सोनी ने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि प्रसारण विधेयक का एक लगभग सर्वस्वीकृत मसौदा संसद के आगामी सत्र के दौरान अप्रैल के आखिर से लेकर मई तक संसद में चर्चा के लिए पेश कर दिया जाए। सोनी ने पत्रकारों के लिए 70-80 लाख रुपये सालाना क्षमता वाले एक कोष के गठन की बात की और कहा कि इससे संबंधित दिशानिर्देश बनते ही इसकी घोषणा की जाए। यह आकस्मिक विपत्ति या आकस्मिक निधन के शिकार पत्रकारों के परिवार वालों की सहायता के लिए होगा।
1 comment:
is tarah ka prayash kafi achcha hai any blog dekh kar apane sujav de
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