नीतिश का मुखौटा, लोगों के साथ धोखा !

कल लुधियाना में एनडीऐ का शक्ति प्रदर्शन था, घटक दलों के साथ राजनैतिक गलियारा हो या मीडिया की बैठकी, एक ही विषय एक ही चर्चा नीतिश और मोदी का मिलन कैसा, किस तरह और क्यूँकर होगा।

बहरहाल एनडीऐ के इस शक्ति प्रदर्शन में सभी शरीक थे और आम जनों की धारणा के विपरीत मोदी और नीतिश ने आलिंगन किया। नि:संदेह ये राजनीति के विपरीत नही था, राजनीति का तो ये पहला सिद्दांत है की विशवास जीतो और उसका घात करो, अपने फायदे के लिए किसी के साथ भी हाथ मिलाना हो तो जरूर मिलाओ आख़िर राजनीति ही तो है।

चोर चोर मौसेरे भाई, राजनीति है भाई!!!!


बिहार में सभी चरण का मतदान हो चुका है, नीतिश लोगों को ठग चुके हैं, अपनी क्षद्म चरित्र को दुहरा चुके हैं, राजनैतिक भ्रष्टता का नया उदाहरण पेश करते हुए, अपने सभी पुराने वायदे घोषणा और यहाँ तक की पार्टी के पदाधिकारी से लेकर कार्यकर्ता तक की मनोभावना के विपरीत मोदी से गल बहलिया की, अब चुनाव समाप्त है और बारी सरकार बनने की है, गद्दी तक पहुँचने के लिए लोगों को ग़लत आश्वासन और विचारधारा की मृत्यु कर चुके हैं।

नीतिश का ये कोई नया चेहरा नही है, जनता दल के विभाजन से लेकर लालू के साथ मन मुटाव हो या समता पार्टी का गठन और विघटन ये सारा कारनामा नीतिश की तानाशाही और निरंकुशता के कारण ही तो हुआ था। आज भी नीतिश की तानाशाही जारी है। जद एस में इसकी साफ़ झलक दिखती है जब शरद यादव नीतिश के छाँव तले चुनाव लड़ने से लेकर पार्टी के मुखिया बनने तक की राह में नीतिश के मोहताज नजर आते हैं, एनडीऐ का कर्णधार और संयोजक जार्ज फर्नांडीज का उदाहरण ज्यादा पुराना तो नही जो पार्टी से नही बल्कि स्वनंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। नीतिश की तानाशाही ही तो है।

बिहार विकास के नाम पर पहले तो नीतिश बिहारवाशी को विकाश का झुनझुना पकडाते रहे, अब विरोधी भी नीतिश के विकाश का गुणगान कर रहे हैं राजनीति ही तो है। मगर क्या विकाश है ?

मीडिया में विकाश, राजनीति में विकाश, सरकार में विकाश विरोधी में विकाश मगर आम आदमी का विकाश ?

नीतिश के विकाश का पोल गाँव में जाने पर खुलता है जहाँ नीतिश के जात पात की राजनीति ने विकाश की धारा को कुंद कर रखा है, मगर कागजी विकाश तो है भले ही आम को विकाश न मिले।

राजनीति के सिद्दांतों का पालन करते हुए जिस तरह से नीतिश ने बिहार की जनता को छला है, आने वाले दिनों में नीतिश उत्तर देने की तैयारी कर लें। विकाश की एक झलक के साथ शीघ्र अनकही उपस्थित होगा।

अनकही अपने मुहीम में जारी है......


7 comments:

Pramod Kaunswal said...

सही पकड़ा-एक चर्चित मुखौटा इन दिनों बूढ़े खंजर के पास पड़ा धूल खा रहा था- वह भले मनुष्य का था लेकिन आपने सटीक जगह पहनाया- और मुखौटे में धोखा क्या कई-कई हत्याएं भी शुमार कर सकते है। बधाई...

Manish Kumar said...

aapka mat to padh liya dekhein janta aapke mat se sahmat hoti hai ya nahin. 16 may mein jyada der nahin hai.

निर्मला कपिला said...

rajneesh je in netaon ki nautanki ne hi to desh ka beda gark kar diya inhen jara bhi sharam nahi badal ne kaha congress ma bete ki party hai lekin uska sara parivar hi sarkar me hai so ye neta besharam hain kuchh bhi bolte hain kya farak padta hai ab inke pas koi mudda to hai nahi bas roothhane manane ka hi kam hai abhinay me abhinetaon ko bhi maat karte hain tabhi to bechare neta inse aagay nahi nikalte khair ab asli drama to shuru hona hai likhte rahiye

Suresh Chandra Gupta said...

नीतिश क्या, सभी मुखौटा लगाए घूम रहे हैं. असली सूरत तो अब उन्हें याद भी नहीं.

वन्दना said...

aajkal sab netaon ka yahi hal hai...........mukhote par mukhote lagaye ghoom rahe hain..........aaj desh mein pahle jaise karndhar kahan varna desh ka naksha hi kuch aur hota......sab ko apni kursi aur vote chahiye hai baki janta ka kya hai.........wo jaise pahle jiti thi vaise hi ab bhi ji legi..........sab jante hain.
aap koshish karte rahein janta ko jagruk karne ki..........hum aapke sath hain.

अग्नि बाण said...

सटीक विश्लेषण
आभार

रंजनी कुमार झा (Ranjani Kumar Jha) said...

एकदम सही कहा,दोनों खोते सिक्के के अलग अलग पहलु मात्र हैं.
आभार

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