Loksangharsha: यहि देश कै भैया का होई ॥ आओ हम....

सत्ता की लाठी से गुंडे ,जबरन भैंसी हथियाए रहे ।
न्याय के खातिर घिसई काका , कोर्ट मा घिघियाये रहे॥
यहि देश कै भैया का होई ॥ आओ हम....
धूर्त सियारऊ गीता बांचै ,बैठ बिल्लैया कथा सुन रही ।
भेङहे करें संत सम्मलेन,गदहन की घोड़ दौड़ होए रही॥
यहि देश कै भैया का होई ॥ आओ हम....
नंग धड़ंग नन्हे मुन्ने, लोटी धूल गुबारन मा।
टामी मेम की गोद मा सोवैं , घूमे ए.सी कारन मा ॥
यहि देश कै भैया का होई ॥ आओ हम....
ठग - बटमार ,छली -कपटी ,अब पहिरैं साधुन कै चोला।
मुंह से राम -राम उच्चारैं ,बगल मा दाबे हथगोला ॥
यहि देश कै भैया का होई ॥ आओ हम....

-मोहम्मद जमील शास्त्री

2 comments:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

शास्त्री जी को दंडवत..... पुराने दिन याद दिला दिये महाराज
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

शास्त्री जी बहुत खूब,
शानदार लिखा है,
जारी रहिये

जय जय भड़ास

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