अब ऐसे में अगर आएशा बहन ने इस दरिंदे को बहनचो** लिख दिया तो आप भाषा पर प्रश्नचिन्ह लगाने लगीं। आप तो आक्रोश का समर्थन कर रही हैं लेकिन निःशब्द क्यों हैं खामोशी इस बात के लिये कि कहीं आँख में आँसू लाकर चीख कर गाली देने से बौद्धिक लोगों की कतार से बेदखल न कर दी जाएं? क्या जरा सी भी लज्जा है इस चुप्पी पर या लज्जा का समीकरण भी निःशब्द ही है। भड़ास पर स्त्रियों को देख कर कई बार लोग हिकारत से देखते हैं लेकिन सच तो ये है कि यही वह मंच है जहाँ हम अन्याय के विरोध में मुट्ठियाँ भींच कर जी भर कर गालियाँ दे लेते हैं अपने आक्रांता को जिसे हम लतिया-जुतिया नहीं सकते। आप वो शब्दकोश ले आइये जिसमें इस तरह के आक्रोश को व्यक्त करने के लिये बिल्कुल सही शब्द हों लेकिन आपकी भाषा में सभ्यता के दायरे में आते हों ताकि हम गंवार भड़ासिन बहनें खुद को रौंदे जाने पर आपकी तरह निःशब्द न रह जाएं। आपको साधुवाद पहुंचे।
जय जय भड़ास
4 comments:
दीदी आएशा ने जो भी लिखा है वह सही है और भाषा भी बिलकुल सही है ऐसे लोगों के लिये किसी भद्रता की आवश्यकता नहीं है और घटनाक्रम ने सिद्ध कर दिया है कि जो आएशा ने कहा है वह सचमुच वही है कि सुअर कहीं का जिसे भोग चुका है उसी को बड़ी बहन कह रहा है और धन्य है सानिया मिर्ज़ा जो उसका साथ दे रही है कल ये कमीना उसे भी अपनी माँ या बहन बताएगा तब सानिया इसे क्या कहेगी???
जय जय भड़ास
गालियाँ असहाय और कमजोरों का हथियार हैं। इनके माध्यम से वे आक्रोश व्यक्त करते है। अगर आप स्वयं को कमजोर मानती हैं तो मुझे कुछ नहीं कहना है। सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
Shoaib ne Ayesha ko apni Aapa (behen) bataya tha... baad mein unhein Talaq bhi diya. to obviously unke liye jo shabd prayog kiya gaya hai wo bilkul sahi hai...
Manisha didi, ek zamane ke baad apka lekh padha. plz aap likhti rahiye..
Danda ji, meri samajh se ye pragatisheel baudhdhik bhasha ka manch nahi hai,man me jo hai,wo agar aksharash bahar aayega to bilkul satik abhivyakti hogi vicharo ki.....
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