दिल्ली से भोपाल होते हुए औरंगाबाद की यात्रा में कुछ स्टेशन पर कुछ झलकियाँ जो मैंने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद की निसंदेह खुबसूरत और आनंददायक है।
भोपाल स्टेशन पर चलती फिरती चाय की दूकान, गरम पानी पीछे लटक रहा है आगे के डब्बे में चाय या काफी, स्वाद कैसा भी हो मगर चुस्की का आनद रात के दो बजे बढ़ जाता है, सुखद अनुभूति होती है।
भोपाल स्टेशन पर चलती फिरती चाय की दूकान, गरम पानी पीछे लटक रहा है आगे के डब्बे में चाय या काफी, स्वाद कैसा भी हो मगर चुस्की का आनद रात के दो बजे बढ़ जाता है, सुखद अनुभूति होती है।


2 comments:
बढ़िया
sundar tasweeren, rochak vivaran.....
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