भारतीय रेल और भारतीयता !

दिल्ली से भोपाल होते हुए औरंगाबाद की यात्रा में कुछ स्टेशन पर कुछ झलकियाँ जो मैंने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद की निसंदेह खुबसूरत और आनंददायक है।


भोपाल स्टेशन पर चलती फिरती चाय की दूकान, गरम पानी पीछे लटक रहा है आगे के डब्बे में चाय या काफी, स्वाद कैसा भी हो मगर चुस्की का आनद रात के दो बजे बढ़ जाता है, सुखद अनुभूति होती है।


भोपाल स्टेशन पर सिक्के की जरुरत है तो नोट डालिए और सिक्के टनटना कर बाहर निकल आयेंगे। मगर हाँ नोट गांधी जी के तस्वीर वाली होनी चाहिए( वैसे नकली नोट भी बिना गांधी जी के नहीं होते) ।


महाराष्ट्र का मनमाड स्टेशन, जहाँ सेवक बाकायदा लंगर के साथ खड़े होते हैं और स्वेआ भावना का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।




हालाँकि आपको इस लंगर के लिए बाकायदा शुल्क देना होता है मगर १० रूपये की मामूली सी रकम में लंगर का अद्बुत आनंद, सेवक की सेवा भावना और लोगों की आस्था बस भारतीयता से ओतप्रोत हमारी संस्कृति की समृद्धता को दर्शा जाता है।

सलाम हमारे भूमि को , सलाम तिरंगे को।

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