अब से पहले भड़ास पर जो विचार रखे जाते रहे हैं लोगों को लगता है कि भड़ासी पगलाए से हैं कि जो चाहे ऊल-जुलूल बोलते रहते हैं। राज ठाकरे और उनकी कथित कुक्कुर सेना की तरफ़ से एक बयान आया तब जबकि इस सेना के कई सैनिकों को पुलिस ने फ़िल्मकारों से जबरन धन उगाही के लिये गिरफ़्तार करा कि फ़िल्मों में "देसी आइटम गर्ल्स" होना चाहिये न कि विदेशी नचनियों को रोज़गार दिया जाए।
कमाल का विचार है देशज बातों के प्रति इतनी गहरी आस्था तो शहीद भगत सिंह से लेकर बिस्मिल तक में न थी। ये सब अमिताभ बच्चन और बेन किंग्सले की फिल्म "तीन पत्ती" की ब्राजीलियन छोकरी तेरी नियत खराब है.... गाने पर नाचने वाली (पचहत्तर प्रतिशत नंगी) को लेकर करा जा रहा है। राज ठाकरे के विचार से सहमति इस विचार के साथ संलग्न है कि फिल्म में आइटम गर्ल के साथ मुंबई में कमाठीपुरा की सारी वेश्याएं भी यदि परप्रांतीय हुईं तो ये सेना इस बात को सहन नहीं करेगी और कमाठीपुरा(जो कि एशिया का सबसे बड़ा वेश्याबाजार है और मुंबई की शान है) में देसज और मराठीभाषी लड़कियो को ही धंधा करने दिया जाएगा।
जय जय भड़ास
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