हुआ यूँ कि कल मैं ऑफिस के काम से कहीं जा रहा था. और एक जगह पर बाईक रोक दी थी. जहाँ बाईक रोकी थी उसी के दाहिनी तरफ एक कार खड़ी थी और वह भी रुकी हुई थी. मैं वहां मात्र दो या तीन सेकंड ही रुका था. और आगे बढ़ने के लिए पहला गियर लगाया ही था कि अचानक कार ड्राईवर ने बिना अपने बाएं तरफ देखे गाड़ी पीछे की तरफ़ हलकी सी बढ़ा दी थी. वह कार मुझसे सिर्फ हलकी सी स्पर्श ही कर पाए थी, लेकिन मेरा खड़े खड़े ही बैलेंस बिगड़ गया और मैं अपने दाहिने तरह गिर गया. यहाँ तक ठीक था बस घुटनों के बल गिरने की वजह से घुटनों में ही चोट आई थी लेकिन जिस वक़्त मैं नीचे गिरा उसी वक़्त एक टैक्सी बहुत तेज़ी से आ रही थी और उस टैक्सी का बम्पर मेरी बाईक से लड़ता हुआ मेरी खोपड़ी (हेलमेटशुदा) में बहुत ज़ोर से लगा और मैं दूर छिटक कर गिर पड़ा...यह पूरा हादसा महज़ चंद सेकंडों में हुआ. तभी दो लोग आये और उन्होंने मुझे उठाया और सहारा देकर बाईक पकड़ा दी. मेरे घुटने में बहुत दर्द हो रहा था. और मेरी हथेली भी थोड़ी सी छिल गयी थी...अब मैं संभल चुका था टैक्सी वाला जा चुका था और कार वाला भी जा चुका था. मेरी जो हालत थी वह तो थी ही लेकिन मुझे अपनी बाईक की हालत देखी नहीं गयी... बाईक के आगे वोयिज़र एक तरफ़ से पूरी तरह से टूट चुका था और और क्लच हैंडिल टूट गया था (गनीमत थी कि क्लच वायर नहीं टुटा था) आगे का मडगार्ड टूट गया था... कुल मिला कर गाडी की पूरी तरह से वाट लग गयी थी...ख़ैर! हिम्मत करके मैंने अपनी टूटीफूटी बाईक स्टार्ट की और अपने ऑफिस आ गया. फ़िर मैंने पड़ोस के डॉ एजाज़ क्लिनिक से ट्रीटमेंट कराया और अपनी गाडी दुरुस्त करके को क़ैसरबाग़ के मशहूर मामू मकेनिक के यहाँ अपनी गाडी बनवाई. पुरे 900 रूपये का चुना लग गया....अब आप सोच रहे होंगे कि यह आपबीती सूना कर कहना क्या चाहता है....तो भैया मैं आपको बता दूं अगर मैंने हेलमेट नहीं लगाया होता तो मेरा सिर पके खरबूजे की तरह फट गया होता जब टैक्सी का बम्पर मेरी खोपड़ी से टकराया था...ब्लोगर बन्धुवों अगर आप बाईक चलाते वक़्त हेलमेट यूज़ नहीं करते तो करना शुरू कर दीजिये क्यूंकि हेलमेट पर खर्च की गए क़ीमत सिर्फ एक टक्कर में ही वसूल हो जाती है...अगर हेलमेट न होता तो पता नहीं मैं किस अस्पताल में पड़ा होता !!!
अगर कल सलीम ख़ान की मृत्यु हो जाती, तो !!! Saleem Khan got injured yesterday!!!
एकबारगी तो मुझे लगा कि आज मेरी मौत हो जायेगी और आँखों के सामने कुछ सेकंड तक अँधेरा भी छ गया था. जो हुआ वह इतनी रफ़्तार में हुआ कि सँभालने का मौक़ा ही नहीं मिला. कल हो सकता था कि मेरी मृत्यु हो जाती लेकिन शायेद नियति को यह मंज़ूर नहीं था...
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1 comment:
समाजोपयोगी अपील,
आपका साधुवाद मित्र.
जय जय भड़ास
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