मेरी बेटी हुमा को उसके क्रूर और अत्याचारी पति ने पांच माह के गर्भ की स्थिति में यह कह कर घर से आधी रात को निकाल दिया कि तुमने मेरे माता-पिता की मर्ज़ी के खिलाफ़ गर्भ धारण क्यों करा। पांच माह का गर्भ हो जाने पर गर्भपात कराने का प्रयास करना भयंकर मूर्खता है जो कि जानलेवा हो सकती है। हुमा सुबह होने तक दरवाजे पर पड़ी गिड़गिड़ाती रही कि रात को कहां जाएगी लेकिन उन राक्षसों को बच्ची पर रहम नहीं आया फिर सुबह होने पर भी जब बात न बनी तो पड़ोसियों के सामने अधिक तमाशा न हो इस लोकलाज के भय से बेचारी बच्ची अपनी माताजी यानि हमारी बहन आयशा आपा के पास आ गयी। तब से अब तक इस मामले को सुलझाने के सैकड़ों प्रयास करे गये लेकिन कुछ कारगर नहीं रहा क्योंकि वो सारे प्रयास बातचीत के द्वारा करे गये थे। यही प्रयास अगर जूते से कर दिये जाते तो शायद कुछ परिणाम निकलता। शादी हुए तीन साल होने को आए लेकिन ससुराल पक्ष का व्यवहार जस का तस है। मेरी बेटी मायके में हम लोगों के साथ रही और गर्भकाल पूरा होने पर ईश्वर की दया से हुमा ने एक सुंदर स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। आजकल के दुष्ट व्यवसायी किस्म के डाक्टरों के लालच के चलते उन्होनें हुमा का प्रसव सिजेरियन आपरेशन से कराया जिसमें कि करीब चालीस हजार रुपये का खर्च आया। खैर पैसा बच्चों से अधिक मूल्य नहीं रखता। बच्ची के होने की सूचना भी ससुराल पक्ष को दी लेकिन कोई प्रतिक्रिया न आयी न ही कोई मिलने देखने आया। बच्ची का नाम रखने की बारी आयी तो हुमा ने मुझसे कहा कि आप ही नाम रखें अपनी नातिन का। सामने एक उत्सव चल रहा था और हिंदुओं की शक्तिरूपा देवी दुर्गा का बहुत बड़ा सा पोस्टर देख कर उस अष्टभुजी शक्तिरूपिणी नारी के ध्यान में मेरे मुंह से निकला.... "दुर्गा" । बच्ची का नाम सभी लोगों ने प्रसन्न मन से आह्लादित होकर जोर से पुकारा , "दुर्गा"......। कोई शंका न करे कि उस चार घंटे की बच्ची के चेहरे पर एक मुस्कान थी उस समय जिसे कि मैं कैमरा लिये होने के कारण सौभाग्यवश कैद कर पाया।
आज चार दाढ़ी वाले मौलाना टाइप लोग मुझसे आकर कहते हैं कि मैं परेशानी में फंसे मुस्लिमों की सहायता का ढोंग करके उनका धर्म परिवर्तन करने का कुत्सित प्रयास कर हुमा को उमा और नवजात बच्ची को दुर्गा बना रहा हूं। मैं किसी प्रचलित धर्म की मान्यताओं पर विश्वास नहीं करता हूं, मैं तो टार्ज़न की तरह हूं। आप लोग सोचिये कि मुझे उन उल्लू के पट्ठों को क्या उत्तर देना चाहिए था। मैंने वही करा जो आप सोच रहे हैं उन सालों को गरियाते हुए लट्ठ उठा कर बाहर का रास्ता ये कह कर दिखा दिया कि अगर दोबारा बकवास करने आए और मेरे बच्चों को सताया तो एक पिता क्या कर सकता है तुरंत दिखा दूंगा, सारा धर्म और मज़हब पिछवाड़े घुसा दूंगा; तब कहां थे ये लोग जब मेरी बच्ची आधी रात को घर से निकाल दी गयी, रात भर दरवाजे पर पड़ी मासूम गर्भवती गिड़गिड़ाती रही, चार माह मेरे साथ रही, बच्ची होने पर हजारों रुपए खर्च हुए??????? और अब नाम को लेकर नौटंकी कर रहे हैं। मेरी नातिन है, हमारे घर के बच्चों के नाम भी अब क्या इन चिरकुटों से पूछ कर रखने पड़ेंगे?
जय जय भड़ास
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