महिला शोषण हो या उत्पीडन, सीधा आरोपी माँ बन जाती है मानो माँ यानी कि घर घर की खलनायिका और इसी चरित्र को तोड़ते हुए पीड़ित माताएं ने जब बाकायदा संगठन बना कर राष्ट्रीय क़ानून और महिला आयोग के ख़िलाफ़ अपनी आवाज बुलंद की तब जा के पता चला कि महिला का हितैषी बनने वाली महिला आयोग नामक संस्था चंद महिलाओं के हाथों की कठपुतली है जिसे ये रोबदार महिलाएं (गिरिजा व्यास और रेणुका चौधरी सरीखी) अपनी राजनैतिक महात्वाकांक्षा को परवान चढ़ाती हैं।
मगर दुर्गा शप्तशती का ये श्लोक आज के सामाजिक परिदृश्य में फिट नही बैठता, कानून हो या महिला आयोग सबके हिसाब से "कुमाता ही भवति" नि:संदेह हमारी भारतीयता को कलंकित करती है।
आइये कुछ तथ्यों से आगे बढ़ें......
नीना धुलिया आल इंडिया मदर इन ला प्रोटेक्शन फॉरम की अध्यक्ष हैं। पहले ये ब्यूटीशियन थी, विवाहोपरांत अपनी जिम्मेदारी को निभाती हुई सिर्फ़ गृहणी रहीं। घर को संवारते हुए बेटे को पाल पोस कर बड़ा करना और फ़िर अरमान से बहु को घर में लाना। बहु घर में आयी और साथ लायी घर के कलेश। घर के कलेश से लेकर मामला कोर्ट में तलाक तक और आरोपी माँ। नीना जी का दर्द कि माँ की बात ना ही पुलिस सुनता है और ना ही कोर्ट और इसी सोच ने इन्हे इस फॉरम को बनाने की प्रेरणा दी।
पंजाब की स्वर्णलता टीचर थीं। विधवा होने के कारण घर में बस माँ और बेटे। बेटे की शादी धून धाम से की मगर बहु के एच आई वी पोजेटिव होने की बात छुपा कर इन्हे धोखे में रखा गया, इन्होने अपनी गाढ़ी कमाई से बहु का इलाज करवाया। बहु के पिता जेल गए तो उनका जमानत भी डेढ़ लाख रूपये भर कर करवाया। बहु ने इनके ज्वाइंट अकाउंट होने का फायदा उठा कर रिटायर होने के बाद के सारे पैसे निकलवा लिए, बाद में दहेज़ प्रताड़ना के केस। आज पंजाब सरकारी स्कूल की मुखिया मारी मारी फ़िर रहीं है, बेटा घर छोर कर कहीं चला गया और बच गया है बहु की धमकी और पुलिस की प्रताड़ना।
दिल्ली की कंचन ने बड़े प्यार से डी पी एस की शिक्षिका को बहु बना कर घर लाया, बहु ने घर के काम के आलावे सब में रूचि दिखाई और ससुराल के पैसे खरचने में कोई कोताही नही की। कंचन के पति डाइलिसिस पर हैं और चल फ़िर नही सकते सो घर के काम काज में हाथ बटाने को कहना कंचन को महंगा पड़ा। बहु के घर वालों ने घर में धमकी दी, दहेज़ उत्त्पीदन का पुलिस केस किया।
दिल्ली की ही कांता भाटिया की कहानी कंचन से इतर नही जब बहु और घर वालों ने मिल कर बीस लाख रूपये मांगे और ना देने पर दहेज़ उत्पीडन का केस।
किरण कुकरेजा बैंक में कार्यरत हैं और पति भी अच्छे ओहदे पर, बेटे के लिए सॉफ्टवेर इंजीनियर बहु किया। बहु ने सारे जेवर गहने और सामान अपने मैके ले कर गई और चाहती है की पति घर जवाई बन कर रहे, बेटे द्वारा मना करने पर दहेज़ उत्पीडन का मामला और अब ये लोग कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं।
ऎसी ही अनेक व्यथा है जिनमे माताएं ने ना सिर्फ़ अपना एकलौता बेटा गंवाया है अपितु सामजिक सम्मान भी क्यूंकि इन पर बहु उत्त्पीदन का मामला है। पुलिस और कोर्ट इनके ख़िलाफ़ है और तो और महिला के लिए लड़ने वाली राष्ट्रीय महिला आयोग भी बिना तथ्यों को जाने राष्ट्रीय बहु आयोग की भूमिका में होती है।
तो क्या महिलाओं के नाम पर बना आयोग राष्ट्रीय महिला आयोग बहु के लिए एक ढाल है और दहेज़ उत्पीडन बहुओं का हथियार। शातिर महिलाओं के लिए निसंदेह ये ऐसा हथियार है जिसका शिकार होने वाली माएँ अपने घर गंवा चुकी है और बेटे गंवा चुकी है और अब दर दर की ठोकरों के लिए मजबूर है। हालत को देखते हुए जहाँ महिला क़ानून में संसोधन की जरुरत है वहीँ महिला आयोग के कार्य को देखते हुए इसमें भी आमूल चूल बदलाव की जरुरत, और इसी के मद्दे नजर माँएं ने बेंगलुरु में अल इंडिया मदर इन ला प्रोटेक्शन फॉरम को रजिस्टर्ड किया जिसकी शाखाएं आज बेंगलुरु होते हुए दुर्ग, भिलाई, मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, लखनऊ सहित ६०० शहरों में पहुँच चुकी है। लोगों में जागरूकता और दहेज़ क़ानून के दुरूपयोग को रोकने के लिए अपनी लडाई को हर छोटे बड़े शहर कस्बे तक ले जाई जा रही है।
फॉरम की अध्यक्षा नीना धुलिया के प्रश्न ही कि क्या माँ महिला नही ये प्रश्न राष्ट्रीय महिला आयोग से और भारत के संविधान और क़ानून से है ?


15 comments:
रजनीश ,
आपको बहुत बहुत धन्यवाद ! इतने संवेदलशील मुद्दा को उठाने के लिए।
aap sahi hai. mahila aayog mahilao ke hito ko chod sabhi bekaar kaam me laga hai. mera anubhav bhi yahi hai
सही है..इस कानून का दुरुपयोग भी जम कर हो रहा है..कई निर्दोष लोग बेवजह ही मानसिक उत्पीडन का शिकार हो रहें हैं...सारे आरोपों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए और दोषी को सजा मिलनी चाहिए.
बिल्कुल ठीक अब सही हुआ है ..बल्कि इस पर तो बहुत पहले ही सोचा किया जाना चाहिए था ..मगर देर से ही सही ..चलिए शुरूआत तो हुई ठीक है यही सही ...अब पानी सचमुच सर के ऊपर से गुजरने लगा था ...
ये सारे आयोग तुष्टिकरण के लिए बने हैं, कुछ मुट्ठीभर लोगों के लिए
अदभुत है लीला।
------------------
ये तो बहुत ही आसान पहेली है?
धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।
mahila aayog ho ya kanoon........sabka ek sa hal hai......sabhi apne banaye raste par hi nhi chalte........dono hi doosre raste par chalte hain jahan name aur fame ho...........vaise aapne bahut hi sahi mudda uthaya hai.
Bahut Barhia...aap maanveey samvedna se jurhe maamle ko behtar dhang se logon ke saamne laate hain... isliye liye dhanyawad.
सही किया इन्होंने सवाल पूछ कर इस कानून का दुरुपयोग अधिक हो रहा है और लाभ कम बहु अपने अवगुण छुपाने के लिये ऐसे आरोप घड लेती हैं इस जानकारी के लिये आभार्
सास बनते या बूढी होते ही महिला आयोग की नज़रों में महिला महिला नहीं रह जाती.... उसके महिला होने क्ले नाते अधिकार समाप्त मने जाते हैं, क्योंकि वह एक पुरुष की माँ है...... पुरुष यानि अत्याचारी, उत्पीड़क, बलात्कारी, दहेज़ लोभी, शैतान. और जिसने शैतान को पैदा किया उसे कुछ सजा तो मिलनी चाहिए न.
बहुत सामयिक पोस्ट है। यह एक कड़वा सच है....आप ने यह पोस्ट यहाँ देकर बहुत अच्छा काम किया है...आभार।
rajneesh, kcuh hadd tak aapki baat se sehmat hun lekin yeh bhi galat nahi hai...ki jab tathaakathit saas apne ghar main bahut ko laati hai toh adhikansh roop se use beti ki tarah sweekar nahi ker paati or ....is satya ko bhi nakara nahi jaa saktaa ki bahuon kaa aaj bhi khoob shoshan hotaa hai...agar iski jimmedar maan nahi toh or kaun hai...pati agar samjhdari dikhata bhi ha i toh maan ke aropn se tang aaker woh bhi apni biwi ko hi doshi manta hai.... ho saktaa hai kai jagah matayen theek bhi hon or bahuyen unpe galat arop lagayen...lekin koi bhi ladki jo apnaa ghar baar sab chod ke aayi hai...use shock nahi hotaa apne pati ki maan se ladne ka yaa buraai kerne kaa...lekin maayen shayad apne bete ki zindagi pe doosron kaa adhikaar bardasht nahi ker paati...galti bhale hi ladke ki ho bahu ko hi dosh diyaa jata hai.... main kahungi sikke ke do pehlu hain....
rajneesh ji ...
aapne bahut hi achcha mudda utthaya
roz hi hum apne charo taraf kitne hi kisse dekh rahe hai ....koi kuch nahi ker pa raha hai........aise mein hum aane wali peeri ko kya de jayenge......sochne ki baat hai..
mahila aayog ka kaam bahut zimme dari hai...inko her pach ki baat sun ker koi rai deni chahiye na ki kisi pooravagrah se........tv serial samajh ko kis disha mein le rahe hai is per nazer kaun rakhega.....?
thanks for sharing
ThnakQ Bhaiyya aisa Mamla uthane ka .Ye jitni sangathan hain sab sirf gnde Politics ka ek hissa hai.Sare aayog saare sangthan sirf P3 me pahuchne ka jariya hai.Baki samajSewa ke naam par yahi bachi khuchi baaten rah jaati hain.
पुरानी कहावत है औरत ही औरत की सबसे बडी दुश्मन है । यह बातआज के परिप्रेक्ष्य में सही साबित हो रही है। कानून की आड में इसे ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल करने वालों की कमी भी नहीं है। रजनीश जी आपके द्वारा उठाये गये प्रश्न सोचने के लिये विवश करते है।
Post a Comment