इस पूरे घटनाक्रम को दूर बैठी एक चील देख रही थी उस चील को बहुत ज़्यादा आश्चर्य हुआ. वह सोचने लगी कि एक शेर जिसे उस बकरी को खा जाना चाहिए वह उसे खाने के बजाये उसकी मदद की! वह बकरी के पास पहुंची और शेर के द्वारा की गयी मदद का कारण जानना चाहा. बकरी ने कहा- उस शेर ने मेरी मदद इसलिए की क्यूंकि एक बार उसकी शेरनी ढूधमुहें बच्चे को छोड़ कर मर गयी थी और मैंने उस के बच्चे को ढूध पिलाया था!!! उस शेर को मेरा वह एहसान याद था जिसके बदले उसने मेरी आज जान बचाई.
चील को यह सब देख और सुन कर बड़ा अजीब लगा लेकिन वह इस घटनाक्रम से बहुत प्रभावित हुई और उसने भी अब यह सोच लिया कि वह भी ऐसा ही अब करेगी...
एक बार एक खेत में नहर का बाँध टूट जाने से उसमें पानी आ गया और उसमें से बहुत से चूहे बिलों में से निकल निकल कर अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे थे। ऊँची जगह पर बैठी चील यह सब देख रही थी उसे उन चूहों पर बहुत दया आई और वह अपनी चोंच में उन्हें दबा कर ऊँची जगह पर ले आई। इस तरह से चील ने उन मरते हुए चूहों की मदद की लेकिन वे चूहे पानी में पूरी तरह भीग चुके थे, और काँप रहे थे यह देख चील ने उन्हें अपने दोनों पंखों के अन्दर ले लिया और उन्हें गर्मी देने लगी. कुछ देर में ही चूहे ठण्ड से निजात पा चुके थे. अब वह अपने स्वभावानुसार अन्दर ही अन्दर उस चील के पंख को काटने लगे और कुछ ही देर में उन्होंने उस चील को पंखहीन कर दिया.
फ़लस्वरूप चील अब उड़ने लायक़ भी नहीं रही और वहां से किसी तरह अपनी जान बचा कर उस बकरी के पास गयी और सारा माजरा सुनाया और उससे पूछा कि तुमने उस शेर पर एहसान किया था जिसके बदले में उसने तुम्हारी जान बचाई थी लेकिन मैंने उन चूहों की जान बचाई तो वे तो मेरी ही जान के दुश्मन बन गए!!!???
"एहसान भी ज़ात देख कर की जाती है" बकरी का जवाब था
"एहसान भी ज़ात देख कर की जाती है" बकरी का जवाब था
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