भडास जिंदाबाद....... (अतीत के पन्ने से.........)

विगत कई दिनों से भडास पर सब अच्छा ही अच्छा था, भडास की लोकप्रियता जग जाहिर है सो सदस्यों में भी आशातीत बढोत्तरी और लेखों को आम ब्लोगर के नजरिये से देखें तो साफ़ भी और सुथरी भी, मगर समय बीतते बीतते भड़ास पर भडास की जगह लोगों के विचार ने लेने शुरू कर दिये। विचारों की साफगोई की भडास का भडासीपन पर ही प्रश्न चिन्ह सा दिखने लगा, और कई लोकप्रिय भडासी अपनी उपस्थिति सिर्फ़ एक झलक मार कर दिखाते रहे, क्रांती वाला भडास तो वहां चला गया जहाँ लोग छि छि और थू थू करते हैं सो हम भी इस से इतर हो जाएँ। मगर ये तो भडास की पहचान को विलीनता की और ले जा रहा था।लोग जब जब भडास के सदस्य बनते हैं तो सदाशयता से पहले भड़ास के कोने में एक जगह है जिसमे भड़ास को समझने और बुझने की बात कही गयी है और भड़ास संविधान के निर्माता का कुक्ख्यात संविधान ही तो भडास की पहचान है, भडासी संस्कृति, भडासी सभ्यता को बताती है। लोगों ने भडासी सदस्यता तो ली मगर संविधान को पढ़े बिना, सो एक बार फ़िर से ॐ भडासाय नमः के साथ भडास संविधान। बस एक नजर मार लो और पेलम पेल में लग जाओ।





भड़ास क्या चीज है, जान लीजिए...

सुनिए, डाग्डर साहेब का कहे रहै

कह दो ना, जो दिल में है !!!

कूड़ा कबाड़ा दिमाग से निकालिए

भड़ास वाकई क्रांति का मंच नहीं है

गालियां भीतर न रखें

जा, जाओ लड़कियों, हम बुरे हैं...

बाप रे, भागो, साले बहसिया रहे...

गणपत, चल दारू ला...

दारूबाजी के फंडे

बड़े प्यारे होते हैं दारू पीनेवाले

क्या ज़िंदगी मिसफिट इंट्रो है??

बरम बाबा को छेड़ दिया, अब बचो!!!

अबे, सुन बे, ओ लड़कियां !

मां बहन भी पढ़ती हैं ब्लाग

हरामजादे प्रोफेशनल व बुद्धिजीवी होते हैं

डा। रूपेश का गोबर डाल रहा हूंरहा हूं



भाई लोगों एक नजर जरा भडासी संविधान पर फ़िर बहसियाइये ना, पेलम पेल में भडासी कहाँ कम होते हैं किसी से,



जय जय भड़ास



1 comment:

मुनव्वर सुल्ताना said...

अग्नि भाई इन सारी लिंक्स का मैटर सुरक्षित रखिये साथ ही इन लिंक्स को बांयी पट्टी पर पहले की तरह सुशोभित कर दीजिये। बहुत दिनों से धनिया की जगह लीद बेचने वाले बनिया की कोई खबर नहीं है......
जय जय भड़ास

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