आईपीएल विवाद पर लोकसभा में लिखित बयान देते हुए शशि थरूर ने कहा कि उनका आईपीएल कोच्चि के निवेशकों से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल नहीं किया।
साथ ही थरूर ने कहा कि पूरे विवाद में सुनंदा पुष्कर का नाम उछलने से आहत हूं और यह सब मेरी छवि खराब करने की साजिश है। गौरतलब है कि आईपीएल कोच्चि में 70 करोड़ रुपये सुनंदा पुष्कर ने लगाए हैं। जिसके बारे में थरूर पर आरोप है कि यह पैसा उनका है।
थरूर ने सफाई देते हुए कहा कि आईपीएल कोच्चि से उनको कोई फायदा नहीं है, लेकिन उन्हें कोच्चि टीम पर गर्व है। उन्होंने आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी पर आरोप लगाया कि इस मामले में उनका व्यवहार अनैतिक है। विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने कहा कि यह पूरा विवाद इसलिए खड़ा किया जा रहा है ताकि कोच्चि टीम से फ्रेंचाइजी छीनकर किसी दूसरे राज्य को यह फ्रेंचाइजी दे दी जाए।
थरूर ने कहा कि इस पूरे मामले में केरल कंसोर्टियम में संरक्षक की मेरी भूमिका तिरूअनंतपुरम से एक सांसद के रूप में और केन्द्रीय मंत्री परिषद के सदस्य के रूप में उचित आचरण की सीमाओं के भीतर रही है। इसमें मेरे मंत्री पद का कहीं से कोई दुरूपयोग नहीं हुआ है। इस मामले का मेरे मंत्रालय से कोई लेना-देना नहीं है। मैं मंत्री के रूप में बोली के नतीजे तो दूर, उसकी प्रक्रिया तक को प्रभावित करने की हैसियत में नहीं था।
थरूर ने मीडिया के सामने अपना बयान पढ़ते हुए कहा कि उनके इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्ष के आरोपों में कोई दम नहीं है।
इससे पहले थरूर के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा दो बजे तक स्थगित कर दी गई है। वहीं शून्य काल में शशि थरूर आईपीएल मुद्दे पर बयान देने लगे, लेकिन विपक्ष ने हंगामा करना शुरु कर दिया। जिसकी वजह से थरूर बयान नहीं दे पाए। इसलिए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उन्हें लिखित में बयान रखने के लिए कहा।
आज सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने थरूर के इस्तीफे की मांग की, जिसके बाद संसद के दोनों सदन 12 बजे तक स्थगित कर दिए गए। वहीं संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील भी की।
सूत्रों के मुताबिक गुरुवार शाम थरूर मुद्दे पर कांग्रेस की बैठक में सोनिया गांधी ने शशि थरूर को क्लीन चिट्ट नहीं दी है। जबकि सेशन से पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर बैठक की।
आईपीएल विवाद में विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का नाम आने पर सरकार को घेरते हुए विपक्षी राजग, वाम दल और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सपा जैसे दलों ने राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चलने दी। हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष और वाम सदन की बैठक शुरू होने के साथ ही इस मामले पर सरकार को बख्शने के मूड में नहीं दिख रहा था। इन दलों के सदस्यों ने प्रश्नकाल स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग शुरू कर दी। हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल पाया और बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इसके बाद दोपहर 12 बजे जब बैठक फिर शुरू हुई तो भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने इसी मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग फिर शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि थरूर सदन के बाहर बयान दे रहे हैं तो उन्हें सदन में आकर बयान देने में क्या आपत्ति है। अहलूवालिया ने कहा कि टेलीविजन के माध्यम से पूरे देश में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है लेकिन सदन में सरकार इस पर चर्चा नहीं होने दे रही है।
भाजपा के ही एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार को इस मामले में उचित ढंग से चर्चा करवानी चाहिए।
इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार चर्चा से बच नहीं रही है और वह इसके लिए तैयार है। हंगामे के बीच ही उपसभापति के रहमान खान ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने दो और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीकांत जेना ने एक विधेयक पेश किया।
इसी बीच भाजपा सदस्य थरूर मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़े रहे। उपसभापति ने उन्हें शांत कराते हुए कहा कि वे शून्यकाल के तहत इस मुद्दे को उठा सकते हैं। इस पर अहलूवालिया ने कहा कि वह इस मुद्दे को शून्यकाल के तहत नहीं उठाना चाहते और उन्होंने सुबह इसके लिए प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा करवाने का नोटिस भी दिया था।
उपसभापति खान ने इसके जवाब में कहा कि प्रश्नकाल स्थगित हो गया है और सदस्यों को इस मुद्दे पर शून्यकाल में चर्चा शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज शून्य काल के लिए चार मुद्दे सूचीबद्ध हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर की जाने वाली चर्चा में तीन मिनट की समय सीमा वाली पाबंदी नहीं रहेगी।
इसी बीच गृह मंत्री पी़ चिदंबरम ने कहा कि सरकार चर्चा से बच नहीं रही है। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने उनकी बात सुनने से ही इनकार कर दिया। हंगामे के बीच ही भाजपा सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। हंगामा थमते न देख उपसभापति ने बैठक सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
साथ ही थरूर ने कहा कि पूरे विवाद में सुनंदा पुष्कर का नाम उछलने से आहत हूं और यह सब मेरी छवि खराब करने की साजिश है। गौरतलब है कि आईपीएल कोच्चि में 70 करोड़ रुपये सुनंदा पुष्कर ने लगाए हैं। जिसके बारे में थरूर पर आरोप है कि यह पैसा उनका है।
थरूर ने सफाई देते हुए कहा कि आईपीएल कोच्चि से उनको कोई फायदा नहीं है, लेकिन उन्हें कोच्चि टीम पर गर्व है। उन्होंने आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी पर आरोप लगाया कि इस मामले में उनका व्यवहार अनैतिक है। विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने कहा कि यह पूरा विवाद इसलिए खड़ा किया जा रहा है ताकि कोच्चि टीम से फ्रेंचाइजी छीनकर किसी दूसरे राज्य को यह फ्रेंचाइजी दे दी जाए।
थरूर ने कहा कि इस पूरे मामले में केरल कंसोर्टियम में संरक्षक की मेरी भूमिका तिरूअनंतपुरम से एक सांसद के रूप में और केन्द्रीय मंत्री परिषद के सदस्य के रूप में उचित आचरण की सीमाओं के भीतर रही है। इसमें मेरे मंत्री पद का कहीं से कोई दुरूपयोग नहीं हुआ है। इस मामले का मेरे मंत्रालय से कोई लेना-देना नहीं है। मैं मंत्री के रूप में बोली के नतीजे तो दूर, उसकी प्रक्रिया तक को प्रभावित करने की हैसियत में नहीं था।
थरूर ने मीडिया के सामने अपना बयान पढ़ते हुए कहा कि उनके इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्ष के आरोपों में कोई दम नहीं है।
इससे पहले थरूर के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा दो बजे तक स्थगित कर दी गई है। वहीं शून्य काल में शशि थरूर आईपीएल मुद्दे पर बयान देने लगे, लेकिन विपक्ष ने हंगामा करना शुरु कर दिया। जिसकी वजह से थरूर बयान नहीं दे पाए। इसलिए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उन्हें लिखित में बयान रखने के लिए कहा।
आज सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने थरूर के इस्तीफे की मांग की, जिसके बाद संसद के दोनों सदन 12 बजे तक स्थगित कर दिए गए। वहीं संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील भी की।
सूत्रों के मुताबिक गुरुवार शाम थरूर मुद्दे पर कांग्रेस की बैठक में सोनिया गांधी ने शशि थरूर को क्लीन चिट्ट नहीं दी है। जबकि सेशन से पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर बैठक की।
आईपीएल विवाद में विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का नाम आने पर सरकार को घेरते हुए विपक्षी राजग, वाम दल और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सपा जैसे दलों ने राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चलने दी। हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष और वाम सदन की बैठक शुरू होने के साथ ही इस मामले पर सरकार को बख्शने के मूड में नहीं दिख रहा था। इन दलों के सदस्यों ने प्रश्नकाल स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग शुरू कर दी। हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल पाया और बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इसके बाद दोपहर 12 बजे जब बैठक फिर शुरू हुई तो भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने इसी मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग फिर शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि थरूर सदन के बाहर बयान दे रहे हैं तो उन्हें सदन में आकर बयान देने में क्या आपत्ति है। अहलूवालिया ने कहा कि टेलीविजन के माध्यम से पूरे देश में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है लेकिन सदन में सरकार इस पर चर्चा नहीं होने दे रही है।
भाजपा के ही एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार को इस मामले में उचित ढंग से चर्चा करवानी चाहिए।
इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार चर्चा से बच नहीं रही है और वह इसके लिए तैयार है। हंगामे के बीच ही उपसभापति के रहमान खान ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने दो और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीकांत जेना ने एक विधेयक पेश किया।
इसी बीच भाजपा सदस्य थरूर मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़े रहे। उपसभापति ने उन्हें शांत कराते हुए कहा कि वे शून्यकाल के तहत इस मुद्दे को उठा सकते हैं। इस पर अहलूवालिया ने कहा कि वह इस मुद्दे को शून्यकाल के तहत नहीं उठाना चाहते और उन्होंने सुबह इसके लिए प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा करवाने का नोटिस भी दिया था।
उपसभापति खान ने इसके जवाब में कहा कि प्रश्नकाल स्थगित हो गया है और सदस्यों को इस मुद्दे पर शून्यकाल में चर्चा शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज शून्य काल के लिए चार मुद्दे सूचीबद्ध हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर की जाने वाली चर्चा में तीन मिनट की समय सीमा वाली पाबंदी नहीं रहेगी।
इसी बीच गृह मंत्री पी़ चिदंबरम ने कहा कि सरकार चर्चा से बच नहीं रही है। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने उनकी बात सुनने से ही इनकार कर दिया। हंगामे के बीच ही भाजपा सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। हंगामा थमते न देख उपसभापति ने बैठक सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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