जल्द ही एक प्रयोग करने का दुःसाहस करने जा रहा हूँ जो कि आजतक पत्राकारिता में किसी ने नहीं करा है। हम भड़ासी ये भी जानते हैं कि इस तरह के प्रयोग तो भड़ास पर ही संभव हैं। ये है मेरी धर्म बहन बहन निर्मला पाटिल जिसे हम सब प्यार से पप्पी कहते हैं। निर्मला जन्म से गूँगी-बहरी है। मैं उसे बहुत प्रयासों के बाद इशारों की भाषा और हिंदी,मराठी व अंग्रेज़ी लिखना पढ़ना सिखा पाया हूँ। अब सोचता हूँ कि इशारों में भाई के साथ मजाक करने और चुटकुले सुनाने वाली निर्मला दुनिया के सामने पत्राकारिता(ब्लॉगिंग) के मंच पर आकर अपने आपको कैसे व्यक्त करेगी। बस इसी इरादे ने और निर्मला के ये कहने पर कि क्या भाई जितनी उंगलियाँ की बोर्ड पर चलाते हो यदि उतनी उंगलियाँ दाल चावल बीनने में लगाओ तो कई क्विंटल दाल चावल साफ़ कर सकते हो। वह अक्षर पहचानती है लिखती है अपनी मूक जिह्वा से आ...बा.... बू... बोलती भी है लेकिन उसे आप तब ही समझ सकते हों जब आप ऐसे बच्चों को प्यार करते हों। आपको याद होगी माँ जो कि बचपन में आपके टूटे-फ़ूटे अल्फ़ाजों में कही हर बात समझ जाती थी सच तो ये है कि आप जिसे प्यार करते हैं उसकी खामोशी भी समझ लेते हैं वह भले कुछ न बोले। निर्मला को आप सब आशीर्वाद दीजिये कि वह अपनी अभिव्यक्ति सही तरीके से कर सके और आप सबका प्यार हासिल कर सके।
जय जय भड़ास
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