मगर शाम होते ही पप्पू को थोरी सी रहत मिली, पता चला की अनकही ने गूगल के इम्तिहान में तैंतीस फीसदी के पास होने वाले आंकड़े से आगे बढ़ते हुए अपने पेज रैंक को चार पर पहुंचा दिया।
आंकड़े आपके सामने हैं, एक तरफ गूगल का पेग रैंक चार जो नि:संदेह एक हिंदी ब्लोगर के लिए गर्व का विषय है वहीँ फेसबुक में हिन्दी श्रेणी में ब्लॉग की वरीयता पहले नंबर पर अनकही और दुसरा भी पप्पू का ही ब्लॉग आर्यावर्त !
अर्थात हिन्दी श्रेणी में शीर्ष पर रहना कहीं पप्पू के अकाउंट का बंद होने का करण तो नहीं?
अनकही अनुत्तरित है मगर अपने प्रश्नों की तलाश में है।
कहीं ख़ुशी कहीं गम मगर हम नहीं किसी से कम, अनकही की लडाई किसी सोसल साईट की मोहताज नहीं मगर हिन्दी के लिए फेसबुक का ये व्यवहार चिंतनीय जरूर है। कहीं हिन्दी के बढ़ते प्रभाव ने यहाँ दवाब तो नहीं बनाया है?
अनुतारीत प्रश्न के उत्तर में चला पप्पू.........
6 comments:
फेल होने और पास होने की एक साथ खिचड़ी शुभेच्छाएं स्वीकार करिये और पचा लीजिये किसी से थोड़ा सा प्यार का घी डलवा कर :)
bahut khub
shekhar kumawta
http://kavyawani.blogspot.com/
विषय बहुत अच्छा है....सोचने पर मजबूर कर दिया आपने...पप्पू फेसबुक और हिंदी..
आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी की गई है-
http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_6838.html
पप्पू तो दोनों जगह पास हो गया...... फेल कैसे हो सकता पप्पू
पप्पू तो दोनों जगह पास हो गया बॉस,फिकर की क्या बात है।
Post a Comment