संयुक्त राष्ट्र द्वारा गठित स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या को रोका जा सकता था। रिपोर्ट में बेनजीर की सुरक्षा में विफलता के लिए तत्कालीन मुशर्रफ सरकार की आलोचना भी की गई है।
संयुक्त राष्ट्र में चिली के राजदूत हेराल्डो मुनोज के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बेनजीर भुट्टो की हत्या को टाला जा सकता था। रिपोर्ट में बेनजीर के पाकिस्तान लौटने पर उनकी सुरक्षा न कर पाने और बाद में हत्या की जांच में जान-बूझकर विफलता के लिए मुशर्रफ सरकार की निंदा की गई है।
जांचकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि बेनजीर की जान को गंभीर खतरे के बारे में सूचना आगे देने के सिवाय अधिकारियों ने खतरे को टालने के लिए कोई सुरक्षात्मक उपाय नहीं किया। मुनोज ने पत्रकारों से कहा कि सरकारी अधिकारी सबसे पहले बेनजीर की रक्षा करने में विफल रहे, और उसके बाद जांच में भी। अधिकारी बेनजीर की हत्या के जिम्मेदार लोगों की पहचान, हमले की योजना, आर्थिक मदद और उसे अंजाम देने के बारे में जांच करने में भी असफल रहे।
मुनोज ने बताया कि बेनजीर की हत्या के दिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संघीय सरकार, पंजाब सरकार और रावलपिंडी जिला पुलिस की थी। इनमें से किसी ने भी बेनजीर की जान को पैदा हुए जबरदस्त और नए सुरक्षा जोखिम के मद्देनजर आवश्यक कदम नहीं उठाए, जिनसे वे अवगत थे।
किसी मुस्लिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने वाली बेनजीर भुट्टो की 27 दिसंबर, 2007 को रावलपिंडी में एक चुनाव रैली के बाद हत्या कर दी गई थी। एक जुलाई, 2009 को बनी मुनोज के नेतृत्व वाली समिति को 31 दिसंबर, 2009 को अपनी रिपोर्ट जमा करनी थी, लेकिन समिति का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई। समिति को हत्या की परिस्थितियों के बारे में जानकारी और सभी तथ्य एकत्रित करने थे। समिति को गुनाहगारों की पहचान करने का काम नहीं दिया गया था।
रिपोर्ट पहले 30 मार्च को आनी थी, लेकिन पाकिस्तान ने समिति से मांग की थी कि रिपोर्ट में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई और सउदी अरब से मिली जानकारियां भी जोड़ी जाएं। इसके चलते रिपोर्ट के सार्वजनिक होने में देरी हुई। मुनोज ने समिति की रिपोर्ट गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून को सौंपी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संघीय सरकार बेनजीर के पाकिस्तान लौटने पर उन्हें प्रभावी सुरक्षा देने की अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुई।
समिति ने कहा है कि आत्मघाती हमले के बाद बेनजीर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त वाहन में अस्पताल ले जाकर असुरक्षित रखा गया, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त रखी जाने वाली बुलेटप्रूफ मर्सिडीज पहले ही रवाना हो गई। रावलपिंडी अस्पताल में पुलिस प्रमुख के आदेशों पर बेनजीर का पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया।
मुनोज ने कहा कि समिति का मानना है कि रावलपिंडी पुलिस प्रमुख ने उच्च अधिकारियों से स्वतंत्र होकर काम नहीं किया। समिति ने इस बात पर भी प्रश्न उठाया कि गृहमंत्री ने हत्या के एक दिन बाद ही विवादास्पद संवाददाता सम्मेलन के आदेश क्यों दिए, जबकि तब तक औपचारिक जांच भी नहीं हुई थी।
समिति ने परिणाम निकाला है कि सरकार का उद्देश्य कभी भी वास्तविक जांच कराने का नहीं था और सरकार मामले को शांत करने के लिए जल्दबाजी कर रही थी, जिससे उसके प्रति देश में विश्वास की कमी हो गई। बेनजीर की हत्या के एक दिन बाद सरकार ने पत्रकार वार्ता में दावा किया था कि बेनजीर की मौत जोरदार विस्फोट के चलते सिर में चोट के कारण हुई। सरकार ने दावा किया कि हमला पाकिस्तानी तालिबान के नेता बैतुल्ला महसूद ने किया। महसूद को अमेरिकी सुरक्षाबलों ने अगस्त 2009 में मार गिराया था।
मुनोज ने कहा कि समिति ने पाया कि सरकार की इस कार्यवाही ने आगे की जांच में बाधा डाली। मुशर्रफ सरकार ने जांच नहीं की, जबकि उन्हें न केवल संघीय स्तर पर बल्कि प्रांतीय स्तर पर भी जांच करानी चाहिए थी।
जांचकर्ताओं ने कई अनसुलझे सवालों का भी जिक्र किया है। सवालों में कहा गया है कि बेनजीर के वाहन के चारों ओर भीड़ को कैसे जाने दिया गया, जिसके चलते वाहन को रुकना पड़ा? बेनजीर की हत्या गोली लगने से हुई या विस्फोट से? बेनजीर का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया? अपराध स्थल को पानी से क्यों धो दिया गया, जिससे सारे सबूत नष्ट हो गए?
बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी ने राष्ट्रपति बनने के बाद संयुक्त राष्ट्र से इस मामले की स्वतंत्र जांच करने की अपील की थी। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि बेनजीर को अलकायदा, पाकिस्तान तालिबान, अन्य जेहादी संगठनों और पाकिस्तान के तथाकथित प्रतिष्ठानों से भी खतरा था, जिनमें पाकिस्तान के सैन्य कमांडर, खुफिया एजेंसी, गठबंधन वाली राजनीतिक पार्टियां और व्यापार सहयोगी शामिल हैं। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि बेनजीर को किसने मारा।
रिपोर्ट में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को हत्या के बाद मामले की जांच में हस्तक्षेप करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई गई है। समिति ने रिपोर्ट तैयार करने से पहले पाकिस्तान में और पाकिस्तान से बाहर लगभग 250 लोगों से पूछताछ की, जिनमें मुशर्रफ, अमेरिका के शीर्षस्थ अधिकारी और जरदारी भी शामिल हैं।
क्या समिति ने कोंडोलिजा राइस से पूछताछ की, इस बारे में मुनोज ने कहा हमने उनसे संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वह उपलब्ध नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र में चिली के राजदूत हेराल्डो मुनोज के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बेनजीर भुट्टो की हत्या को टाला जा सकता था। रिपोर्ट में बेनजीर के पाकिस्तान लौटने पर उनकी सुरक्षा न कर पाने और बाद में हत्या की जांच में जान-बूझकर विफलता के लिए मुशर्रफ सरकार की निंदा की गई है।
जांचकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि बेनजीर की जान को गंभीर खतरे के बारे में सूचना आगे देने के सिवाय अधिकारियों ने खतरे को टालने के लिए कोई सुरक्षात्मक उपाय नहीं किया। मुनोज ने पत्रकारों से कहा कि सरकारी अधिकारी सबसे पहले बेनजीर की रक्षा करने में विफल रहे, और उसके बाद जांच में भी। अधिकारी बेनजीर की हत्या के जिम्मेदार लोगों की पहचान, हमले की योजना, आर्थिक मदद और उसे अंजाम देने के बारे में जांच करने में भी असफल रहे।
मुनोज ने बताया कि बेनजीर की हत्या के दिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संघीय सरकार, पंजाब सरकार और रावलपिंडी जिला पुलिस की थी। इनमें से किसी ने भी बेनजीर की जान को पैदा हुए जबरदस्त और नए सुरक्षा जोखिम के मद्देनजर आवश्यक कदम नहीं उठाए, जिनसे वे अवगत थे।
किसी मुस्लिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने वाली बेनजीर भुट्टो की 27 दिसंबर, 2007 को रावलपिंडी में एक चुनाव रैली के बाद हत्या कर दी गई थी। एक जुलाई, 2009 को बनी मुनोज के नेतृत्व वाली समिति को 31 दिसंबर, 2009 को अपनी रिपोर्ट जमा करनी थी, लेकिन समिति का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई। समिति को हत्या की परिस्थितियों के बारे में जानकारी और सभी तथ्य एकत्रित करने थे। समिति को गुनाहगारों की पहचान करने का काम नहीं दिया गया था।
रिपोर्ट पहले 30 मार्च को आनी थी, लेकिन पाकिस्तान ने समिति से मांग की थी कि रिपोर्ट में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई और सउदी अरब से मिली जानकारियां भी जोड़ी जाएं। इसके चलते रिपोर्ट के सार्वजनिक होने में देरी हुई। मुनोज ने समिति की रिपोर्ट गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून को सौंपी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संघीय सरकार बेनजीर के पाकिस्तान लौटने पर उन्हें प्रभावी सुरक्षा देने की अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुई।
समिति ने कहा है कि आत्मघाती हमले के बाद बेनजीर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त वाहन में अस्पताल ले जाकर असुरक्षित रखा गया, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त रखी जाने वाली बुलेटप्रूफ मर्सिडीज पहले ही रवाना हो गई। रावलपिंडी अस्पताल में पुलिस प्रमुख के आदेशों पर बेनजीर का पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया।
मुनोज ने कहा कि समिति का मानना है कि रावलपिंडी पुलिस प्रमुख ने उच्च अधिकारियों से स्वतंत्र होकर काम नहीं किया। समिति ने इस बात पर भी प्रश्न उठाया कि गृहमंत्री ने हत्या के एक दिन बाद ही विवादास्पद संवाददाता सम्मेलन के आदेश क्यों दिए, जबकि तब तक औपचारिक जांच भी नहीं हुई थी।
समिति ने परिणाम निकाला है कि सरकार का उद्देश्य कभी भी वास्तविक जांच कराने का नहीं था और सरकार मामले को शांत करने के लिए जल्दबाजी कर रही थी, जिससे उसके प्रति देश में विश्वास की कमी हो गई। बेनजीर की हत्या के एक दिन बाद सरकार ने पत्रकार वार्ता में दावा किया था कि बेनजीर की मौत जोरदार विस्फोट के चलते सिर में चोट के कारण हुई। सरकार ने दावा किया कि हमला पाकिस्तानी तालिबान के नेता बैतुल्ला महसूद ने किया। महसूद को अमेरिकी सुरक्षाबलों ने अगस्त 2009 में मार गिराया था।
मुनोज ने कहा कि समिति ने पाया कि सरकार की इस कार्यवाही ने आगे की जांच में बाधा डाली। मुशर्रफ सरकार ने जांच नहीं की, जबकि उन्हें न केवल संघीय स्तर पर बल्कि प्रांतीय स्तर पर भी जांच करानी चाहिए थी।
जांचकर्ताओं ने कई अनसुलझे सवालों का भी जिक्र किया है। सवालों में कहा गया है कि बेनजीर के वाहन के चारों ओर भीड़ को कैसे जाने दिया गया, जिसके चलते वाहन को रुकना पड़ा? बेनजीर की हत्या गोली लगने से हुई या विस्फोट से? बेनजीर का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया? अपराध स्थल को पानी से क्यों धो दिया गया, जिससे सारे सबूत नष्ट हो गए?
बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी ने राष्ट्रपति बनने के बाद संयुक्त राष्ट्र से इस मामले की स्वतंत्र जांच करने की अपील की थी। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि बेनजीर को अलकायदा, पाकिस्तान तालिबान, अन्य जेहादी संगठनों और पाकिस्तान के तथाकथित प्रतिष्ठानों से भी खतरा था, जिनमें पाकिस्तान के सैन्य कमांडर, खुफिया एजेंसी, गठबंधन वाली राजनीतिक पार्टियां और व्यापार सहयोगी शामिल हैं। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि बेनजीर को किसने मारा।
रिपोर्ट में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को हत्या के बाद मामले की जांच में हस्तक्षेप करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई गई है। समिति ने रिपोर्ट तैयार करने से पहले पाकिस्तान में और पाकिस्तान से बाहर लगभग 250 लोगों से पूछताछ की, जिनमें मुशर्रफ, अमेरिका के शीर्षस्थ अधिकारी और जरदारी भी शामिल हैं।
क्या समिति ने कोंडोलिजा राइस से पूछताछ की, इस बारे में मुनोज ने कहा हमने उनसे संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वह उपलब्ध नहीं हैं।

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