दोहे और उक्तियाँ !!



सब्र की मन में कमान हो, सब्र की ही हो डोर।

सब्र का ही जब तीर हो, ख़ालिक़ तेरी ओर।।


(शेख़ फरीद)
~~~~~

No comments:

Post a Comment