आज, मेरे दिल का ताजा हाल

इस दिल में तन्हाई थी ..

रात के अंधेरे में भी उस की परछाई थी ॥
हम तो मांगते रहे उसे हर दुआ में ..

शायद हमारे ही हाथों की लकीरों में जुदाई थी

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