प्रशांत का इलाज होकर रहेगा.

प्रशांत जिस बीमारी से गुजर रहा है मेरा ख्याल है वो बहुत खतरनाक समाप्ति की और उसे ले जायेगी। अब जबकि प्रशांत भड़ास के मंच पर आ गया है तो हमें चाहिए इसे इसकी बीमारी से निजात दिलवाएं। दरअसल प्रशांत की बीमारी खतरनाक तो है मगर लाइलाज नहीं। रुपेश भैया से मेरी विशेष गुजारिश है कि इस बच्चे को ठीक करने में हमारी मदद करें। आप सब चाहेंगे तो ये कल का स्वामी अमृतानंद या साध्वी प्रज्ञा नहीं बन पायेगा।
प्रशांत साध्वी प्रज्ञा और अमृतानंद के नामों से तो तुम परिचित ही होगे। अब तुम बताओ कैसे कह सकते हो कि मुस्लिम ही आतंकवादी होता है। ठीक है तुम बोडो, उल्फा, एलटीटीई, इन लोगों को आतंकवादी न मनो। पर साध्वी और अमृतानंद को तो मानोगे। तुम्हारे साथ दिक्कत ये है कि तुम बस एक सोच बना चुके हो उस से निकलना नही चाहते। दोस्त जो मौकापरस्त लोग भगवन राम के नही हुए वो हमारे क्या होंगे। मैंने सन ९० में जो कारसेवकों पर गोलियां चलवाई गई थीं वो भी देखा है और ९२ में जब बाबरी ढांचा गिराया गया था वो भी ग्यारह साल की ही उम्र में देखा है। अन्तर एक था गोलिया चलवाकर ढांचा बचाने वाली हुकूमत मुलायम सिंह की थी। और ढांचा गिराने में मदद करने वाली सरकार कल्याण सिंह की थी। आज दोनों एक ही पाले में हैं। १८ सालों बाद अब तस्वीर साफ़ हो रही है। दोनों तुम्हारे जैसे धर्मान्ध लोगों का फायदा उठाना चाहते हैं। दरअसल मुसलमानों का अंधसमर्थन या हिन्दुओं के हर अच्छे बुरे कामों का समर्थन करने वाले उनके शुभचिंतक नही होते। दोनों एक दूसरे के धुरविरोधी तो दिखाई देते हैं मगर दोनों एकदूसरे से समझकर ही अपनी रननीति बनाते हैं। दोनों की रणनीति होती है कि हमें कैसे लड़ाया जाय। कितनी गहरी खाई खोद दी जाय हमारे बीच।
आज बेचारा बाबरी एक्शन कमेटी का मुद्दई हाशिम अंसारी चिल्लाचिल्ला कर कह रहा है कि आज उसे समझ में आया कि मुलायम ने कैसे उन लोगों का यूज किया। यही हाल हिंदू संगठनों का भी है। जो विश्व हिंदू परिसद राम जन्म भूमि के परमहंस दास के चरणों में हमेशा पड़ी रहती थी उसी परमहंस की समाधी पर आप नजर दौड़ा लीजिये आपको पता चल जाएगा किस तरह ये लोग भूलने की कला में माहिर हैं। कुत्ते भी वहां मल त्याग करते हैं। अभी कल ही मैंने विहिप के प्रवक्ता से पुछा की आप लोग तो परमहंस जी को बिल्कुल भूल गए हैं तो उन्होंने विहिप की जिम्मेदारी से इनकार कर दिया। आप बताइए इन मौकापरस्तों को आप जैसे लोग अपना रहनुमा मान बैठे हैं। ये आपकी रहनुमाई कर सकते हैं। हो सकता है अभी आप कहें कि मैं भी इन लोगों से सहमत नहीं हूँ। पर मेरे भाई आपकी सोच इन्हीं लोगों से प्रेरित है। आपने कहा कि मीडिया ईसाई मिशनरियां संचालित कर रही हैं ये प्रोपेगंडा भी संघ द्वारा ही फैलाया गया है। प्रोपेगंडा का इस्तेमाल करने में गजब के माहिर होते हैं ये लोग। जरूरत है कि आप इनके प्रोपेगंडा को समझें बस यूँ ही अपना बयान न दें।
आपने फरहीन को पढ़ा होगा अपने एक आर्टिकल में उसने टाईम्स ग्रुप की धज्जियाँ उडाई है। आप उसकी सोच को देखिये वो चाहती तो जो उर्दू ख़बर उसने पढ़ा था उसको आधार बनाकर हिंदू संगठनों की ऐसी तैसी करती। मगर उसने चीजों को बहुत डीपली देखा। उसे समझ में आया कि ये क्या उसी ग्रुप के दूसरे अख़बार में वो ख़बर गायब है जो उर्दू अख़बार की हेडलाइन बनी हुई है। उसने इसके पीछे के मंतव्य को समझा और हमारे सामने रख दिया। आप इस तरह से चीजों को देखिये। मैं अभी आपका इलाज जारी रखूँगा इस खुराक से आप पर क्या असर हुआ ये देखने के बाद क्यूँ कि अभी बहुत सी दवाईयां हम भडासियों के झोले में है। आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद करता हूँ कि आपकी शल्य चिकित्सा की आवश्यकता हमें नहीं होगी.

3 comments:

गुफरान सिद्दीकी said...

चन्दन भाई
प्रशांत के लिए सभी भडासी भाई परेशान हैं अब आप भी मैदान में कूद गए हैं लेकिन मै जनता हूँ की जो आप ठान लेते हैं कर के रहते हैं और मुझे पूरी उम्मीद है की आप जल्द ही बिना शल्य चिकित्सा के! अपनी कही हुई बात को पूरा करेगे....
शुभकामनाओं सहित आपका हमवतन भाई ....गुफरान...(A.P. Forum Faizabad)

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

आमीन,
आप सफल हों.
जय जय भड़ास

फ़रहीन नाज़ said...

बीमार भाई के इलाज के लिये हम भी दुआ और प्रयास दोनो कर रहे हैं आशा है कि बीमारी लाइलाज नहीं है बस थोड़ा सा वातावरण और खाने-पीने में गड़बड़ी के कारण जान पड़ रहा है।
चंदन भइया हौसला अफ़जाई के लिये दिल से धन्यवाद
जय जय भड़ास

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