जैसा खाओ अन्न वैसा हो मन

2 comments:

अजय मोहन said...

अरे दीदी जी कुछ लिखे बिना ही पोस्ट डाल दी क्या बात है कुछ गोपनीय संदेश है क्या किसी के लिए??

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

कृष्णा जी,
मन तो बाग़ बाग़ हो गया, शीर्षक पढ़ कर ही आगे लिखेंगी तो बल्लियों उछलने लगेगा ;-)
जय जय भड़ास

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