समय की धरा पर हूँ मैं यूं चल रहा,
जिस तरह पंछी उड़ रहे गगन में,
विचारों का समूह है यूं उमड़ रहा,
जिस तरह बादल गरज रहे आसमान मे |
आते हैं विचार अक्सर उन्मुक्त स्वप्न में,
खो जाते हैं बरबस हम अपनी लगन में,
ले आयेंगे नव भोर हम रात्री प्रहार मे,
फिर चमकेगा सूर्य स्वछन्द नीले गगन मे ||
फिर चमकेगा सूर्य स्वछन्द नीले गगन मे
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1 comment:
जरूर चमकेगा सूर्य लेकिन जब आसमान में कालिमा छा गई है तो उसे दूर करने का जतन भी हमें ही करना होगा,लिखते रहिए
जय जय भड़ास
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