एक कविता शहीदों के नाम

हुकुम ख़ुदा का माने, या सियासी मेहरबानों का, 
गर्दिश में तारे हिन्दोस्तान के नज़र आते हैं,
या माने उनकी जो खुद फ़नाह हुए,
जो आजकल ख्वाबों में नज़र आते हैं

1 comment:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

इसी तरह से लिखते रहिये,जोरदार,कड़क...
जय जय भड़ास

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