सुन्दरतम सजनी

स्मृति-प्रिय सुंदरतम सजनी !

आया जब से तुम से मिल कर ,

ले - ले चुम्बन आलिंगन भर ,

नहीं भूलता मैं वह रजनी -

आच्छादित घन घोर घटा मैं,

पानी बरस रहा था रिमझिम ,

चकमक चमके विधुत-स्वर्णिम ,

अग-जग था अचित निद्रा मैं ;

आकर चुपके से पा अवसर ,

तुमने कितने धीरे - धीरे ,

हाथ बढ़ाकर मेरे नीरे,

था खींचा जब मेरा अम्बर ,

पाकर किंचित चेतनता को ,

करवट बदली ली अंगडाई ,

उसनींदी बाहें फैलाई ,

ज्यों ही मैंने ऊर्ध्व दिशा को ,

आई पुलकित जल्दी इतनी ,

लिए अतुल सुकुमार - शीलता ,

बाहु - पाश मैं, नहीं भूलता ,

स्मृति - प्रिय सुन्दरतम सजनी !


:-प्रणव सक्सेना अमित्रघात


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