"बी प्रोफेशनल"

आज रूपेश भइया के सौजन्य से भड़ास पर लिखने का मौका मिला है। अपने लेखन में इमानदारी बरतने के साथ कोशिश करूँगा की मै भी आप लोगों जैसी अच्छी लेखन शैली में अपनी बातों को समझा सकूँ। बहरहाल अब मै अपने इस शीर्षक पर आता हूँ। आज कल एक बात मेरे लिए शोध का विषय बनी हुई है - "प्रोफेशनल शब्द की सही व्याख्या क्या है?" मैंने इस बारे में पहले भी लिखा है आज आप सभी के सामने रख रहा हूँ जो इस शब्द का निष्कर्ष मैंने निकालाहै।
आप किसी भी फील्ड से जूड़े हों। आपको दो शब्दों की एक लाइन अक्सर पेशे से जूड़े हुए अपने साथी और बॉस से सुनने को मिलती होगी, "Be Professional" आखिर प्रोफेशनल होना किस चिडीया का नाम है। हम सब जब तक अपने अपने पेशे से नहीं जूड़े थे तब तक तो यही जानते थे कि प्रोफेशनल होना मतलब अपने काम के प्रति ईमानदार होना। काम के समय सिर्फ काम के बारे में सोचना. एक कहानी भी बचपन में पढ़ी थी. सरदार वल्लभ भाई पटेल एक बार कोर्ट में किसी खास मुक़दमे की बहस में व्यस्त थे. उसी बीच उनके पास एक पत्र आया. उन्होंने पत्र पढ़कर जेब में रख लिया और अपना काम जारी रखा. बहस ख़त्म होने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों से बोला कि उन्हें अभी तुंरत वहां से जाना होगा. क्यूँ कि उनकी बीवी का देहांत हो गया था. यह सूचना उन्हें कोर्ट में बहस के दौरान उसी पत्र से मिली थी. फिर भी उन्होंने अपना काम जारी रखा. मैं सोचता था कि प्रोफेशनलिज्म का इससे बेहतरीन उदाहरण हो ही नहीं सकता. पर मैं गलत था, कम से कम उस परिप्रेक्ष्य में जिस में आज प्रोफेशनलिज्म की परिभाषा दी जाती है. पत्रकारिता के पेशे से आप जुड़े हैं तो प्रोफेशनलिज्म का मतलब है कि अगर किसी का बेटा मरा है और मां-बाप के आंसू सूख चुके हैं ऐसे में आपको उन्हें कुरेद कुरेद कर रुलाना है रोते हुए बाईट लाना अच्छे प्रोफेशनालिस्ट की निशानी है. अगर आप किसी थाने में हैं और पति-पत्नी का झगड़ा पुलिस निपटा ले जाती है और पत्नी पति के कुछ एक्शन विजुअल नहीं मिल पाते तो आप कत्तई प्रोफेशनल नहीं हैं. किसी शादी में थोड़े बहुत विवाद की सूचना मिलने पर अगर आप पहुंचे और बारात बिना पिटे वापिस चली गयी तो आप बेकार हैं. क्यूँ कि इन बातों की चिंता प्रोफेशनल लोग नहीं करते कि बेइज्जत हुए लोग खुदखुशी करेंगे या जीवन में उनके लड़के-लड़की की शादी नहीं हो पायेगी. ऐसी तमाम उपलब्धियां आपको बार बार हासिल करनी पड़ेंगी अगर आप प्रोफेशनल कहलाना पसंद करते हैं. फिल्मों में कैसे प्रोफेशनल कहलाते हैं मुझे बहुत सटीक अंदाजा तो नहीं मगर फिल्मों को देखकर ही अंदाजा लगता है कि वहां भी किसी स्ट्रगलर लड़की को सपने दिखाकर उसका शारीरिक शोषण का विरोध करने वाले को कत्तई प्रोफेशनल नहीं कहा जाता. अगर लड़की अपना हक मांगती है तो "be Professional" कहकर शांत कराया जाता है. बात करते हैं मार्केटिंग और फाइनेंस के क्षेत्रों की. अगर आप अपने किसी ब्रोकर को शेयर में इन्वेस्ट करने के लिए पैसे दे रहे हैं तो थोडा सावधान हो जाइये. अगर आपका ब्रोकर या एजेंट प्रोफेशनल हुआ तो आपके पैसे को वो किसी शेयर में न निवेश करके आपका इंश्योरेंस कर देगा. मात्र अपना टारगेट पूरा करने के लिए. और ऐसा करने की सलाह उसका बॉस देता है, Be Professional कहते हुए. इस पंच लाइन का प्रयोग करने वाले ज्यादातर लोग एक और पंच लाइन बार बार प्रयोग में लाते हैं. "ufff your bloddy principles". आप सोच लीजिये अगर आप प्रोफेशनल हैं तो अपने ब्लडी प्रिंसिपल्स को तो भूल ही जाइये .ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जहाँ प्रोफेशनल का वास्तविक अर्थ है झूठ, मक्कारी, वादाखिलाफी जैसे गुणों से लैस होना. मगर चिंता मत कीजिये ये सारे गुण आपको तरक्की दिलाने में आवश्यक हैं. इन गुणों को अब बुरी नजर से नहीं देखा जाता.

4 comments:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

चंदन भाई
जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग
"चंदन" विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग
कोढ़ की तरह चू रही व्यवसायिकता से बच कर इस विषय पर ऐसी पैनी कलम चलाना सिद्ध कर रहा है कि आप सही अर्थों में भड़ासी हैं। ऐसे ही बखिया और तुरपायी उधेड़ते रहिये। शुभकामनाएं
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना said...

चंदन भाई,धुंआधार लिखते हो ऐसे ही जरा अपनी खुशबू को पूरे ब्लाग जगत में बिखेरो चंदन होना सार्थक करिये।
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

चंदन भाई,
आपका भड़ास परिवार में स्वागत है, और क्या शानदार इंट्री मारी है पहले ही लेख में चौका.
व्यवसायिकता ने जिस तरह से हमारे जमीर को कुंद कर दिया है उस पर बड़ी सटीक लेखनी है आपकी, बेहतरीन भड़ास.
साथ ही धेरक शुभकामनाएं.
जय जय भड़ास

चंदन श्रीवास्तव said...

भडासी दोस्तों,
आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया मुझे इतनी अच्छी प्रतिपुष्टि देने के लिए. कोशिश करूँगा कि आप सभी की उम्मीद पर कायम रहूँ.

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