मधुबनी के अनुमंडलाधिकारी सर वाटसन द्वारा स्थापित वाटसन उच्च विद्यालय ने मधुबनी को कई विभूतियाँ दी है जिन्होंने मिथिला का मान सम्मान शीर्ष पर पहुँचाया है।
चलिए वर्तमान में तस्वीरों से हम इस स्कूल का भ्रमण करें।
आज भी वाटसन स्कूल के नाम से ही प्रसिद्द इस विद्यालय ने वर्तमान राजनैतिक महत्वाकांक्षा में अपना नाम खोया, नाम बदल कर इसी बहाने द्वार तो बना दिया गया मगर नही हुआ तो स्कूल का भवन विस्तार। जी हाँ आज भी उन्ही चंद कमरों में सभी क्लास लगते हैं।
क्या ये विकास है ?
स्कूल प्रसाशन ने भवन के बजे ईटों से पेड़ का पेड़ जरूर बना दिया मगर जर्जर भवन और जर्जर सड़क अपनी कहानी ख़ुद बयाँ करती है।
कभी ये विज्ञान के छात्रों का प्रोग्शाला हुआ करता था, आज भवन चकाचक जो सिर्फ़ बैठकों के काम आता है अर्थात छात्रों के लिए कुछ भी नही। इस मैदान में खेल कर मधुबनी के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल और जिले का नाम रौशन किया, आज यह मैदान रख रखाव के बिना चारागाह बना हुआ है, ना खेल की सुविधा और ना व्यवस्था, अर्थ के नाम पर दूर एक नए भवन को जरूर बना दिया गया ( नि:संदेह ऐसे भवन कमीशन के पर आधारित होते हैं) मगर छात्र सुविधा से कोसो दूर हैं।
ह्रदय द्रवित है क्यूंकि मधुबनी के प्रतिष्ठा की जननी कराह रही है।


2 comments:
इस विद्यालय का भवन और हालत देख ह्रदय द्रवित हो जाता है .
मन खराब हुआ है. अक्सर सोचता रह जाता हूँ, हिमाचल के पिछड़े इलाक़े भी इतने उपेक्षित नहीं हैं. क्या कारण है?----- अशिक्षा, जंसंख्या, राजनीति, या जनता की उदासीनता....
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