
मैं बेरोजगार हूँ
कल तक जो जान छिड़कते थे...
वे ढूंढने से भी नहीं मिलते!
अब कोई नहीं कहता...
दोस्त! मैं अब भी तुम्हारे साथ हूँ...
यह अजीब इतेफाक नहीं...
यह वो वक़्त है...
जब मैं बेरोजगार हूँ।
अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
कल तक जो जान छिड़कते थे...
वे ढूंढने से भी नहीं मिलते!
अब कोई नहीं कहता...
दोस्त! मैं अब भी तुम्हारे साथ हूँ...
यह अजीब इतेफाक नहीं...
यह वो वक़्त है...
जब मैं बेरोजगार हूँ।
अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
2 comments:
दुश्मनों से प्यार होता जाएगा,
दोस्तों को आजमाते जाइए..
मोहम्मद हुसैन-अहमद हुसैन की गाई ये ग़ज़ल ना जाने क्यूं बरबस ही याद आ गई...
nice
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